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Tuesday, September 14, 2021
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ई-पास की वेबसाइट हुई क्रैश, बाजार जाने के बजाय दिनभर इसी में उलझे रहे लोग

बोकारो ः राज्य की हेमंत सरकार की ओर से जारी लॉकडाउन के दौरान घर से बाहर से निकलने के लिए जरूरी ई-पास मिलना इतना आसान नहीं, जितना अफसर  दावे कर रहे हैं। लांच होने के पहले दिन शनिवार की शाम से ही वेबसाइट काफी स्लो हो गई। इतनी स्लो की कभी यह खुलती नहीं और कभी खुली भी पूरी तरह नहीं। लॉगिन के लिए जरूरी कैप्चा तक नहीं आ रहा था। दूसरे दिन रविवार को तो ई पास झारखंड डॉट एनआईसी डॉट इन डोमेन वाली यह वेबसाइट पूरी तरह से ठप हो गई। एक अदद पास बनाने के लिए पूरे-पूरे दिन लोग मोबाइल, कंप्यूटर से चिपके रहे। लोग बाहर जरूरी काम पर जाने के बजाय दिनभर इसी में उलझे रहे। रविवार को साइट ज्यादातर जगहों पर खुल ही नहीं सकी। एड्रेस बार में साइट का यूआरएल एंटर करते ही दिस साइट कैन नॉट बी रिच्ड का मैसेज सामने आ जाता था। अगर गलती से साइट खुल भी गई तो ईपास बनाने की प्रोसेसिंग ही नहीं हो पा रही थी।

रोजमर्रा की जरूरत लानेवालों को ज्यादा परेशानीसबसे ज्यादा परेशानी उन आमलोगों को हो रही है, जो घर से लगभग रोज दैनिक जरूरतों की चीजें, साग-सब्जी, दूध, राशन, दवा आदि लेने जाया करते थे। एक तो पुलिसिया दबंगई का खौफ और ऊपर से सख्ती के चलते लोग काफी उलझन में दिख रहे हैं। उनका कहना है कि एक पास तो सही से बनता नहीं, फिर दोबारा बनाने की बात की बेकार है। ऐसे में उनका जरूरी काम से निकल पाना भी दूभर हो गया है। अफसर को निर्देश देते हैं, पुलिस वाले भी डंडे लेकर तैयार हो जाते हैं, लेकिन आम पब्लिक की परेशानी कोई समझ नहीं रहा। इस व्यवस्था से खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में काफी निराशा देखी जा रही है। गांव के ज्यादातर पुराने लोग न तो एंड्रॉयड फोन रखते और न ही उन्हें इतना तकनीकी ज्ञान है कि वे स्वयं से आवश्यक कार्यों के लिए भी पास बनाकर कहीं बाहर निकल सकें। ऐसे में यह व्यवस्था केवल लोगों को परेशान करने से ज्यादा और कुछ नहीं।

इधर, हरेक पास पर 100 रुपए की वसूली
जानकारी के अनुसार ई-पास की अनिवार्यता अब कुछ लोगों के लिए दुकानदारी का नया अवसर बन सामने आई है। चास निवासी वाई मिश्रा ने बताया कि उन्हें ई-पास बनाना आता नहीं और बाहर साइबर कैफे वगैरह भी खुल नहीं रहे, जहां वो यह बनवा सकें। आसपास पता करने पर एक व्यक्ति ने प्रत्येक  बनाने पास के एवज में 100 रुपए की मांग की। आमलोगों का कहना है कि अगर उनका काम किसी कारणवश दो घंटे में पूरी नहीं हो पाया, तो क्या लोग दिनभर पास पास बनाने में ही लगे रहेंगे। जबकि एक पास बन पाना भी दूभर है। लोगों का कहना है कि कोरोना संक्रमण को लेकर वे स्वयं जागरूक हैं। एक तो वैसे ही महामारी ने जीना मुहाल कर रखा है, इसमें इस तरह आम लोगों को परेशान करना कहीं से भी सरकार का उचित कदम नहीं।

बाहर जाने को एडवांस पास बनाया, तो शहर में मूवमेंट होगी ठप
ई-पास की तकनीकी खामियों में एक बड़ा पहलू यह भी है कि अगर एक वाहन संख्या से पहले कोई पास पहले बन गया तो तब तक दूसरा पास नहीं बनेगा, जबतक कि उसकी वैधता समाप्त न हो जाय। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब लोग एडवांस में कहीं बाहर जाने का पास बना लेते हैं। इस बीच बाहर जाने की तारीख से पहले अगर उन्हें शहर में उसी वाह से मूवमेंट की आनिवार्यता आन पड़ी तो वे जा ही नहीं सकेंगे। उस वाहन नंबर पर उनका पास बनेगा ही नहीं। यही नहीं, एक मोबाइल नंबर पर खोले गए एकाउंट से एक ही वाहन का ई-पास जेनरेट हो रहा है। दूसरे का आप्शन भी नहीं।

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