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Saturday, June 12, 2021
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भयमुक्त रहकर कोविड 19 पर विजय प्राप्त किया जा सकता है

वैश्विक महामारी कोविड 19 अब तक से पहले के महामारियों से कुछ भिन्न है। हम प्लेग की हीं बात करते हैं, जिसने एक समय देश के अधिकांश हिस्से को अपने चपेट में ले लिया था। उसमें होता यह था 

कि घरों में चूहे मर जाते थे और उनमें पिल्लू पड़ जाते थे। जिससे पूरे घर में एक वायरस फैल जाता था और यह वायरस समूचे घरवासियों को अपने चपेट में ले लेता था। जिसका नाम प्लेग दिया गया था। इससे यह स्पष्ट है कि प्लेग नामक महामारी चूहे से फैलनेवाली एक महामारी थी। साथ हीं यह एक से दूसरे में भी फैल जाता था। उस समय लोग गांव घर छोड़कर चुहरहित जगह की तलाश कर घर से बाहर निकलकर रहने को मजबूर हो गए थे। जिसे आपके चाहने और नहीं चाहने का कोई तात्पर्य नहीं है। उस समय इस महामारी के चपेट में घर के घर साफ हो गए। अभी हम कोविड 19 की चर्चा करते हैं, जिसमें कोविड 19 भले हीं चाइना में चमगादड़ से फैली हो, परंतु हमारे देश भारत में यह महामारी एक आदमी से दूसरे आदमी में फैल रहा है।

               प्रश्न यह है कि इस महामारी का हम सामना कैसे करें ? कहते हैं कि मृत्यु से तबतक भयभीत रहा जा सकता है जब वह कोसों दूर हो। लेकिन उस वक्त जब मेरे सामने दस्तक दे रही हो तब उसका डटकर मुकाबला किया जाना चाहिए। मेरे हिसाब से हम इस महामारी का सामना भय- मुक्त रहकर कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले हमें इससे उतपन्न भय को अपने अंदर से निकालना होगा। अपने को पूर्णतः भय मुक्त बनाना होगा। इसके लिए जो दो रास्ते हैं, पहला यह कि हमें यह बीमारी लग गई है और दूसरा यह कि मैं और मेरे परिवार के किसी सदस्य को यह बीमारी अभी तक छू नहीं पाई है। दोनों हीं स्थितियों में भयमुक्त होकर डटकर मुकाबला करना है। परंतु दोनों स्थितियों में मुकाबला करने के स्तर में अंतर है। जिन्हें यह बीमारी लग गई है, उन्हें हम चाह के भी चिंता मुक्त नहीं कर सकते। परन्तु भयमुक्त तो कर हीं सकते हैं। मरीज को हर स्थिति में नए विकल्प को आलिंगन करना चाहिए और उनके चिकित्सक को उन्हें बचाने का हर सम्भव प्रयास करना चाहिए। यह कदापि नहीं सोचना चाहिए कि अभी यह हाल है, तो अब क्या होगा ? हमें हमेंशा यह सोचना होगा कि अभी जो हालात है इसका क्या क्या विकल्प है। जिन्होंने भी इस फार्मूले को अपनाया है, उन्हें औरों के अपेक्षाकृत बेहतर रिजल्ट मिला है। जिन्हें या उनके घरेलू वातावरण में किसी को यह बीमारी नहीं लगी है, उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को सुझाये गए हर एहतियात को आलिंगन करना होगा। तब जाकर भयमुक्त हुआ जा सकता है।

विनय कुमार तिवारी , संपादक

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