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Saturday, May 8, 2021
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सार्वजनिक इकाइयों को बेचने का काम कर रही केंद्र सरकार-हेमंत सोरेन

युवा वर्ग में जबरदस्त आक्रोश

रांची। मुख्यमंत्री   हेमन्त सोरेन बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी एवं 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित बैठक में सम्मिलित हुए। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन   और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट)  के सितंबर में होने जा रहे टेस्ट को लेकर 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ की।

बैठक में मुख्यमंत्री   हेमंत सोरेन ने कहा कि श्रम्म् एवं छम्म्ज् की परीक्षा का विषय आज हम सबों के समक्ष आ खड़ा हुआ है। झारखंड में लगभग 23 हजार बच्चे जेईई एवं 21 हजार बच्चे नीट की परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा केंद्र राज्य के मात्र 5 शहरों में सीमित है। जिस प्रकार से भारत सरकार ने प्रवासी मजदूरों की समस्या की पहले अनदेखी की एवं बाद में स्थिति बिगड़ने के बाद राज्यों के माथे मढ़ दिया था उसी प्रकार अब यह बच्चों के साथ करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन बचने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है ऐसे में बिना समुचित व्यवस्था किए आखिर केंद्र सरकार कैसे परीक्षा लेने पर आमदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा होती है तो पूरी तरह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था को खोलना पड़ेगा, झारखंड में तो बड़ी संख्या में बच्चे बिहार, यूपी एवं अन्य पड़ोसी राज्यों से भी परीक्षा देने आएंगे।

मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन ने कहा कि महीना से ऊपर लग गया था केंद्र सरकार को मजदूरों की समस्या स्वीकार करने में। हम लगातार मांग कर रहे थे कि इनकी वापसी की व्यवस्था की जाए पर इन्हें समस्या दिख ही नहीं रही थी। उन्होंने कहा कि थाली बजवाने और दीया जलाने में यह लोगों को उलझाए रखे। उन्होंने  बैठक में सम्मिलित सभी से आग्रह किया कि हम लोग मांग रखें कि कुछ महीनों के लिए इन परीक्षाओं को टाल दिया जाए और अगर करवाना ही है तो केंद्र सरकार सही व्यवस्था करवाते हुए आगे बढ़े।

हेमन्त सोरेन ने अपनी बातें रखते हुए कहा कि आज आत्मनिर्भर भारत के नाम पर केंद्र सरकार सिर्फ एक काम सही से कर रही है और वह है सार्वजनिक इकाइयों को बेचने का काम। देश में  लगभग 45 सार्वजनिक कंपनियों को बेचने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे का निजी करण तीव्र गति से किया जा रहा है। सभी समस्याओं का हल इन्हें निजी करण में ही दिखता है। जनता के बीच में जो अपने राज्य में देख रहा हूं, रेलवे के निजीकरण के खिलाफ काफी आक्रोश है। आमजन को, खास कर युवा वर्ग को अपनी नौकरी जाते हुए दिख रही है एवं लोगों को किराया बढ़ते हुए दिख रहा है।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि राज्य वित्तीय रूप से टूट चुके हैं और केंद्र सरकार राज्यों के हिस्से की जीएसटी की राशि भी देने में आनाकानी कर रही है। वित्त की स्थाई संसदीय समिति के समक्ष इस संदर्भ में केंद्र सरकार ने अपनी असमर्थता जताई है। उन्होंने कहा कि केंद्र-राज्य संबंध मेरे हिसाब से कोविड-19 का अगला शिकार दिख रहा है। जीएसटी के आने के बाद से राज्यों के पास आर्थिक संसाधन जुटाने के बहुत कम स्रोत बचे हुए हैं। ऐसे में जब केंद्र सरकार जीएसटी के नियमों में राज्यों के हित को समाहित करने की तो छोड़िए अभी के नियम के अनुसार भी उनका हक का पैसा जो होता है वह नहीं देती है तो अविश्वास तो बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएसटी के भुगतान में 6 से 12 महीने का विलंब हो रहा है। अमूमन सभी राज्यों का हजारों करोड़ रुपया केंद्र सरकार के पास बकाया है। मुख्यमंत्री ने इस निमित्त सभी से आग्रह किया कि हमें एक सम्मिलित मांग पत्र भारत सरकार को भेजना चाहिए।

मुख्यमंत्री  ने कहा कि संकट की इस घड़ी में जब राज्य वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं तो केंद्र सरकार को राज्यों के लिए जीएसटी कंपनसेशन की राशि एवं अवधि बढ़ा देनी चाहिए। कुछ विषयों पर जीएसटी से तत्कालिक राहत देनी चाहिए। राज्यों को कर लगाने संबंधी अधिकार देना चाहिए। आज तो एजी ने भी इस संबंध में अपना मंतव्य दे दिया है।

मुख्यमंत्री   हेमन्त सोरेन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह कैसा गणित है इन लोगों का? देश मंदी की मार झेल रहा है, किसान व्यापारी सभी परेशान हैं और केंद्र सरकार डीजल एवं पेट्रोल के दाम बढ़ाकर के मुनाफा कमा रही है। डीजल एवं पेट्रोल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज भी वृद्धि की गई है, पिछले 10 दिनों में 9 बार डीजल एवं पेट्रोल के कीमतों पर वृद्धि की गई है। हम सभी को मिलकर इसका जोरदार विरोध करना चाहिए।

मुख्यमंत्री  ने बैठक में कहा कि पर्यावरणीय इपैंक्ट एसेस्मेंट  के नियमों में बदलाव की जो तैयारी हो रही है उसे हर किसी ने गलत ठहराया है। लगभग 20 लाख कमेंट आए हैं उस पर, सरकार उसको पब्लिक डोमेन में लाए एवं विस्तार से चर्चा की मांग होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिर कुछ प्रावधान जो हमारे समक्ष आया है उसे कोई कल्याणकारी राज्य कैसे अपना सकता है ?मुख्यमंत्री ने कहा कि  झारखंड जैसे राज्य के लिए यहां एक बहुत बड़ी आबादी प्रकृति की पूजा की है उसके लिए निश्चित ही यह एक बड़ा विषय है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित इस बैठक में बंगाल की मुख्यमंत्री  ममता बनर्जी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री   भूपेश बघेल एवं पांडुचेरी के मुख्यमंत्री   नारायण स्वामी शामिल थे।

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