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Wednesday, March 3, 2021
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एनटीपीसी के लैगुन ध्वस्त होने से विद्युत उत्पादन ठप होने के कगार पर

भागलपुर (एजेंसी) | जिले के कहलगांव एनटीपीसी के ऐश डाइक क्षेत्र में लैगून के ध्वस्त होने से बिजली का उत्पादन फिलहाल बाधित हो गया है।

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वहीं अब इसका असर ये है कि जहां 2340 मेगावाट विद्युत उत्पादन हो रहा था वहीं अब महज 920 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पा रहा है।

यही नहीं कुल सात यूनिट में से 4 यूनिट को भी बंद करना पड़ा है। बंद होने वाले यूनिट में 500 मेगावाट की दो यूनिट और 210 मेगावाट की दो यूनिट शामिल है।

एनटीपीसी के अधिकारियों की मानें तो लैगून नंबर 2 में कोयला मिश्रित राख वाले पानी का दबाव बढ़ने से यह हादसा हुआ है। जबकि इससे कई एकड़ एरिया में भू धसान हुआ है। वहीं दूसरी ओर कोयला के राख मिश्रित पानी के बहने से क्षेत्र के कई एकड़ खेतों में लगी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।

इस मामले में कार्यकारी निदेशक चंदन चक्रवर्ती के निर्देश पर विद्युत उत्पादन इकाई से उत्पादन तत्काल रोक दिया गया है।

विद्युत आपूर्ति बाधित होने की आशंका पर मंत्रालय ने लिया संज्ञान

लैगुन के ध्वस्त होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने की खबर मिलते ही ऊर्जा मंत्रालय हरकत में आया। मंत्रालय के अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए अपने वरीय अधिकारियों को मौके पर जांच के लिए भेजने का फैसला किया।अधिकारी शुक्रवार को हवाई मार्ग से एनटीपीसी पहुंचकर वस्तुस्थिति का जायजा लेंगे।

हले भी कई बार हुई है, ऐसी घटनाएं

एनटीपीसी के लैगुन – टू का बांध टूटना ये कोई नई बात नहीं है, इससे पहले भी 4-5 एश डाइक का बांध टूटकर ध्वस्त हो चुका है।

सबसे पहले 2014 में लैगुन थ्री में करीब 300 मीटर बांध धंसा था।इसके बाद निर्माणधीन थ्री डीएमसी में मई 2020 और जून 2020 में सूखे में ही बांध धंस गया। ऐसी घटनाएं कई बार होने के बावजूद लापरवाही जारी रहा। अधिकारियों ने निर्माण के समय धंसने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

ऐश डाइक के ठेके में वर्चस्व की लड़ाई जगजाहिर……मौजूदा घटना भी इसी का नतीजा

एनटीपीसी सूत्रों के अनुसार, कहलगांव के ऐश डाइक में ठेके को लेकर वर्चस्व की लड़ाई हमेशा चलती है, और ऐश को लेकर पूर्व में भी अलग-अलग गुटों में खूनी झड़प हो चुकी है। यानी कमीशन को लेकर अलग-अलग गुट एक दूसरे के आमने-सामने होते रहे हैं। ऐश डाइक के लैगून के तटबंध के क्षतिग्रस्त होने के पीछे भी बाहर की दूसरी कम्पनी को मिले ठेके को कारण बताया जा रहा है। इन सब के बावजूद आखिरकार सच्चाई क्या है ? यह तो जांच का विषय है।लेकिन ऐश उठाने को लेकर पूर्व में हुए भिड़ंत को भी नजरअंदाज उचित नहीं है

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